झार टाइम्स की खबर से हिला प्रशासन, नेतरहाट में आदिवासी जमीन लूट पर चला अब तक का सबसे बड़ा एक्शन

महुआडांड़ नेतरहाट में वर्षों से चल रहे आदिवासी जमीन लूट के खेल पर आखिरकार प्रशासन की नींद टूट गई है। झार टाइम्स में अवैध होटल और रिसॉर्ट निर्माण को लेकर खबर सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया और एसडीएम विपिन दुबे ने अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई करते हुए करीब 100 होटल–रिसॉर्ट संचालकों को नोटिस थमा दिया है। इसके साथ ही सभी निर्माण कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। कार्रवाई के बाद पूरे नेतरहाट क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल है।
15 साल से चल रहा था जमीन हड़पने का संगठित खेल
नेतरहाट, जिसे झारखंड का ‘क्वीन ऑफ हिल्स’ कहा जाता है, वहां पिछले 10–15 वर्षों से सुनियोजित साजिश के तहत आदिवासियों की जमीन को निशाना बनाया जा रहा था। आरोप है कि बाहर से आए होटल कारोबारी और जमीन माफिया फर्जी व भ्रामक एग्रीमेंट कर आदिवासियों को मामूली रकम थमाकर उनकी पुश्तैनी जमीन हड़प रहे थे। बाद में इन्हीं जमीनों पर आलीशान होटल और रिसॉर्ट खड़े कर मोटा मुनाफा कमाया जा रहा था।कानून की खुली धज्जियां, सीएनटी एक्ट को किया गया नजरअंदाज
पूरा मामला सीएनटी एक्ट का खुला उल्लंघन
इतना ही नहीं, नेतरहाट का बड़ा इलाका पलामू टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आता है, जो इको-सेंसिटिव जोन घोषित है। इसके बावजूद बिना किसी अनुमति के जमीन की खरीद-बिक्री और धड़ल्ले से निर्माण कार्य जारी था, मानो कानून सिर्फ कागजों तक ही सीमित हो।
एसडीएम का संदेश: एक इंच जमीन भी नहीं जाने देंगे
एसडीएम विपिन दुबे ने साफ चेतावनी देते हुए कहा कि आदिवासियों की जमीन किसी भी कीमत पर छीनी नहीं जाएगी।उन्होंने स्पष्ट किया कि:
आदिवासी जमीन पर बने होटल या रिसॉर्ट में मालिकाना हक आदिवासी का ही रहेगा
सभी संचालकों को जमीन के वैध कागजात प्रस्तुत करने होंगे एग्रीमेंट के आधार पर ली गई जमीन के पूरे दस्तावेज जांच के दायरे में होंगे इको-सेंसिटिव जोन क्लियरेंस के बिना निर्माण अवैध माना जाएगा गड़बड़ी मिलने पर कठोर कानूनी कार्रवाई और ध्वस्तीकरण से भी पीछे नहीं हटेगा प्रशासन
नेतरहाट की सुंदरता पर माफियाओं का हमला
प्राकृतिक वादियों, हरियाली और शांत वातावरण के लिए मशहूर नेतरहाट की पहचान आज खतरे में है। कोयल व्यू प्वाइंट, सनसेट पॉइंट जैसे इलाकों में बेतरतीब और अवैध निर्माण ने इसकी खूबसूरती को गहरी चोट पहुंचाई है। साथ ही, भूमि दलालों के जरिए आदिवासी समाज के अधिकारों का खुला शोषण किया गया।
झार टाइम्स की रिपोर्टिंग बनी निर्णायक मोड़
इस पूरे मामले में झार टाइम्स की खोजी रिपोर्टिंग ने अहम भूमिका निभाई। खबर सामने आते ही प्रशासन को मजबूरन कार्रवाई करनी पड़ी और वर्षों से चल रहे अवैध कारोबार पर लगाम कसने की शुरुआत हुई।
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