केवरकी पुल बना भ्रष्टाचार का अड्डा, नियम-कानून ताक पर, जनता की जान खतरे में!

महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत करकट से गढ़बुधनी जाने वाली सड़क पर स्थित केवरकी गांव का पुल आज सरकारी तंत्र की नाकामी और ठिकेदार–अधिकारी गठजोड़ का सबसे बड़ा सबूत बन चुका है। पुल मरम्मत के नाम पर ऐसा खेल खेला गया है, जिसने जनता की सुरक्षा को सीधे तौर पर दांव पर लगा दिया है।सूत्रों और ग्रामीणों के अनुसार, ठिकेदार ने एक महीने के भीतर ही अत्यंत हड़बड़ी और जल्दबाजी में मरम्मत कार्य कर दिखावे की खानापूर्ति कर दी। न किसी सरकारी मानक का पालन, न तकनीकी प्रक्रिया की जांच और न ही गुणवत्ता नियंत्रण यानी पूरा काम नियम-कानून को रौंदकर किया गया।ग्रामीणों का आरोप है कि मरम्मत में घटिया छड़ , सीमेंट, बालू और गिट्टी का इस्तेमाल हुआ है। हालत यह है कि मरम्मत के कुछ ही दिनों बाद पुल पर दरारें दिखने लगी हैं, जिससे बड़े हादसे की आशंका गहराती जा रही है।इस पुल से रोजाना सैकड़ों लोग गुजरते हैं किसान, मजदूर, स्कूली बच्चे, मरीज और बुजुर्ग। अगर पुल कभी भी क्षतिग्रस्त हुआ तो जान-माल के भारी नुकसान से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद प्रशासन आंख मूंदकर बैठा हुआ है।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शिकायतों के बाद भी अब तक कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर जांच करने नहीं पहुंचा। इससे साफ जाहिर होता है कि या तो सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है या फिर भ्रष्टाचार में सबकी हिस्सेदारी है।ग्रामीणों का गुस्सा अब फूटने को तैयार है। लोगों ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि पुल मरम्मत की उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो वे सड़क जाम करेंगे और उग्र आंदोलन करेंगे।
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