विदेशी पक्षियों से गुलजार है महुआडांड़ का साले डेम

महुआडांड़ प्रखंड के साले डेम इन दिनों प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से जीवंत हो उठा है। कड़ाके की ठंड शुरू होते ही हजारों किलोमीटर दूर साइबेरिया, मंगोलिया और मध्य एशिया जैसे क्षेत्रों से आए पक्षियों ने यहां डेरा डाल लिया है। शांत जलाशय, खुले आकाश और अनुकूल मौसम ने साले डैम को उनके लिए सुरक्षित ठिकाना बना दिया है।आसमान और पानी में रंग-बिरंगी हलचलसुबह-सुबह आकाश में झुंड बनाकर उड़ते बार-हेडेड गूज और जल में अठखेलियां करते सुर्खाब (ब्राह्मणी डक) देखते ही बनते हैं। इनके साथ ही कई अन्य जलपक्षी भी यहां दिखाई दे रहे हैं, जिससे पूरा इलाका किसी प्राकृतिक उत्सव जैसा प्रतीत होता है।
सर्दियों का सुरक्षित पड़ाव
विशेषज्ञों के अनुसार, सर्द मौसम में भोजन की उपलब्धता, अपेक्षाकृत शांत वातावरण और जलाशय की स्वच्छता प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करती है। यही कारण है कि महुआडांड़ क्षेत्र हर साल शीतकाल में इनके विश्राम और प्रजनन के लिए पसंदीदा स्थल बनता जा रहा है।
पर्यटन और जागरूकता को बढ़ावा
इस मनमोहक दृश्य को देखने के लिए आसपास के गांवों और दूर-दराज़ से प्रकृति प्रेमी, पक्षी विशेषज्ञ और फोटोग्राफर बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है और आजीविका के नए अवसर भी बन रहे हैं।
संरक्षण—हम सबकी जिम्मेदारी
वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे पक्षियों को परेशान न करें, तेज़ शोर, प्लास्टिक कचरा और अवैध शिकार से बचें। प्रकृति की इस अनमोल विरासत को सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस सौंदर्य का आनंद ले सकें।
साले डैम, महुआडांड़ न केवल जैव विविधता का अनूठा उदाहरण है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि यदि हम प्रकृति का सम्मान करें, तो वह हमें सौंदर्य और समृद्धि—दोनों लौटाकर देती है।
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