संस्थापक की कलम से: सेवा, संवेदना और संकल्प की कहानी

महुआडांड़
मानव जीवन की सबसे सुंदर, सबसे पवित्र और सबसे बड़ी पहचान सेवा है। सेवा वह दीपक है, जो स्वयं जलकर दूसरों के जीवन में प्रकाश भरता है। जब मनुष्य अपने स्वार्थ, सुविधा और सीमाओं से ऊपर उठकर किसी दूसरे के दुःख को अपना दुःख समझने लगता है, तभी मानवता सजीव होती है, तभी समाज सशक्त बनता है।RPS SEWA SANSTHANCHARITABLE TRUST की नींव भी इसी विचार, इसी अनुभूति और इसी आत्मिक संकल्प से रखी गई है।यह कहानी केवल एक संस्था की नहीं है, न ही किसी एक व्यक्ति की उपलब्धियों की गाथा है। यह कहानी उन अनगिनत चेहरों की है, जिनकी आँखों में हमने पीड़ा देखी, जिनके जीवन में अभाव महसूस किया और जिनके मन में निराशा की गहरी छाया पाई। उन आँखों में आशा की लौ जलाना, उन जीवनों में विश्वास भरना और उन चेहरों पर मुस्कान लौटाना ही इस संस्थान का मूल उद्देश्य बना।जब हमने समाज को निकट से देखा, उसकी वास्तविकताओं को महसूस किया, तब यह स्पष्ट हुआ कि सहायता की आवश्यकता किसी एक वर्ग, धर्म, जाति या भाषा तक सीमित नहीं है। जरूरतमंद हर जगह हैं—कभी सड़क किनारे बैठा भूखा बच्चा,कभी अकेलेपन से जूझता असहाय वृद्ध,कभी आर्थिक अभाव में शिक्षा से वंचित युवा,तो कभी सामाजिक और मानसिक संकटों से घिरी महिलाएँ।इन सभी के बीच एक समान पीड़ा है—सहारे की कमी और संवेदना की आवश्यकता।RPS SEWA SANSTHAN CHARITABLE TRUST की स्थापना इसी सोच के साथ की गई कि सेवा कभी दिखावे का माध्यम नहीं होनी चाहिए। सेवा मंचों से दिए गए भाषणों में नहीं, बल्कि चुपचाप किसी के आँसू पोंछने में होती है। सेवा तब सार्थक होती है जब किसी की सहायता इस तरह की जाए कि उसका आत्मसम्मान बना रहे।दान केवल शब्दों, घोषणाओं या क्षणिक भावनाओं का नाम नहीं है, बल्कि निरंतर, ईमानदार और निस्वार्थ कर्मों की श्रृंखला है।इस सेवा यात्रा में हमें अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। संसाधन सीमित थे, मार्ग कठिन थे और कई बार परिस्थितियाँ हतोत्साहित करने वाली भी रहीं। कई ऐसे क्षण आए जब लगा कि प्रयास बहुत छोटे हैं और समस्याएँ बहुत बड़ी लेकिन हर बार किसी जरूरतमंद की सच्ची मुस्कान ने हमें फिर से खड़ा किया।जब किसी बच्चे ने पहली बार किताब अपने हाथों में ली,जब किसी परिवार को संकट के समय सहारा मिला,और जब किसी बुज़ुर्ग ने आशीर्वाद देते हुए कहा“अब हम अकेले नहीं हैं,”तभी हमें अपने प्रयासों की वास्तविक सार्थकता समझ आई।हमारा यह दृढ़ विश्वास है कि मानवता किसी पहचान की मोहताज नहीं होती। न जाति मनुष्य को बड़ा बनाती है, न धर्म और न ही भाषा। मनुष्य का मनुष्य के लिए खड़ा होना ही सबसे बड़ा धर्म है। इसी भावना के साथ ट्रस्ट ने समाज में एक सेतु बनने का प्रयास किया है—सहयोग का सेतु, संवेदना का सेतु और विश्वास का सेतुआजRPSSEWASANSTHANCHARITABLE TRUST केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक विचारधारा है। यह एक ऐसा आंदोलन है जो लोगों को जोड़ता है, समाज को जागरूक करता है और यह याद दिलाता है कि हम सभी एक-दूसरे के लिए जिम्मेदार हैं। हमारा सपना है एक ऐसा समाज जहाँ कोई भूखा न सोए, कोई शिक्षा से वंचित न रहे, कोई असहाय खुद को अकेला न महसूस करे और हर व्यक्ति को सम्मान के साथ जीने का अवसर मिले।हम मानते हैं कि बड़ा बदलाव छोटे-छोटे प्रयासों से ही आता है। यदि हर व्यक्ति थोड़ा-सा योगदान दे, थोड़ा-सा समय निकाले और थोड़ी-सी संवेदना दिखाए, तो समाज का स्वरूप बदला जा सकता है।आइए, हम सब मिलकर इस सेवा यात्रा का हिस्सा बनें।हाथ से हाथ जोड़कर,दिल से दिल जोड़कर,और मानवता को अपना सबसे बड़ा धर्म मानकर एक ऐसे समाज का निर्माण करें जहाँ हर चेहरा मुस्कुराए और हर जीवन सशक्त बने।यही मानवता है।यही हमारा मार्गहैयहीRPSSEWASANSTHANCHARITABLE TRUST की आत्मा है।
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