पेसा कानून लागू होना आदिवासी सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम: आफताब आलम

लातेहार।झारखंड में पेसा (पंचायत विस्तार अनुसूचित क्षेत्रों तक) कानून के लागू होने को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में सरगर्मी तेज हो गई है। इसी क्रम में युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष आफताब आलम ने गुरुवार को लातेहार परिसदन भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में राज्य सरकार के इस फैसले का स्वागत किया।आफताब आलम ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं मंत्री दीपिका पांडेय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने लंबे समय से लंबित पेसा कानून को लागू कर साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय लिया है।उन्होंने कहा कि झारखंड में लगभग 17 वर्षों तक भाजपा की सरकार रही, लेकिन इस अवधि में पेसा कानून को लागू करने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई। इसके विपरीत, हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार ने आदिवासी समाज की वर्षों पुरानी मांग को समझते हुए इसे कैबिनेट से मंजूरी दिलाई।आफताब आलम ने जानकारी दी कि 24 दिसंबर 2025 को राज्य कैबिनेट द्वारा पेसा कानून लागू किया गया, जिससे झारखंड के 15 आदिवासी बहुल जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। इस कानून के लागू होने से ग्राम सभाओं को वास्तविक अधिकार प्राप्त होंगे और जल, जंगल व जमीन से जुड़े निर्णय अब ग्राम सभा स्वयं ले सकेगी।उन्होंने कहा कि इससे न केवल स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि पारंपरिक अधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित होगी। पेसा कानून आदिवासी समाज को सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।आफताब आलम ने जोर देते हुए कहा कि इस कानून को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि सकारात्मक और दूरदर्शी नजरिए से देखा जाना चाहिए। इससे प्रशासन में पारदर्शिता आएगी और विकास कार्यों में स्थानीय जरूरतों व परंपराओं का सम्मान सुनिश्चित होगा।उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि पेसा कानून का प्रभावी और ईमानदार क्रियान्वयन किया जाए, ताकि इसका वास्तविक लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके और झारखंड में समावेशी विकास का सपना साकार हो सके।
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