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महुआडांड़ में अवैध बंगला ईंट भट्ठों का काला कारोबार, रात के धुएं से घुट रहा ग्रामीण इलाका

महुआडांड़ (लातेहार), 14 दिसंबर 2025।

  • महुआडांड़ प्रखंड में बिना लाइसेंस अवैध बंगला ईंट भट्ठों का संचालन
  • रात में भट्ठियों की आग और धुएं से प्रदूषित हो रहा पूरा ग्रामीण इलाका
  • बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर, सांस व आंखों की समस्या बढ़ी
  • उपजाऊ खेतों की मिट्टी की अवैध खुदाई से कृषि संकट की आशंका
  • प्रशासन व वन विभाग ने जांच और सख्त कार्रवाई का दिया आश्वासन

घटना का विवरण

महुआडांड़ प्रखंड क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित बंगला ईंट भट्ठे प्रशासनिक नियमों और पर्यावरणीय मानकों को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं। दिन में सामान्य दिखने वाला ग्रामीण इलाका रात होते ही भट्ठियों की आग, घने धुएं और दुर्गंध से ढक जाता है।
बिना किसी वैध लाइसेंस, पर्यावरणीय स्वीकृति और सरकारी अनुमति के यह अवैध कारोबार लंबे समय से फल-फूल रहा है।


रात के अंधेरे में धधकते भट्ठे

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, जैसे ही अंधेरा गहराता है, भट्ठों में कोयला और लकड़ी झोंककर ईंट पकाने का काम शुरू कर दिया जाता है। पूरी रात भट्ठियां जलती रहती हैं और तड़के सुबह ट्रैक्टर व ट्रकों के जरिए ईंटों की ढुलाई विभिन्न इलाकों में कर दी जाती है।
दिन में भी उठने वाला घना धुआं आसपास के गांवों की हवा को जहरीला बना रहा है, जिससे लोगों का खुले में रहना मुश्किल हो गया है।


स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा

भट्ठों से निकलने वाले धुएं और बदबू का सीधा असर ग्रामीणों की सेहत पर पड़ रहा है। बच्चों और बुजुर्गों में सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, खांसी और एलर्जी की शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं।
एक ग्रामीण ने बताया,

“रात में बदबू इतनी तेज होती है कि दरवाजे-खिड़कियां बंद करके भी चैन से सांस नहीं ले पाते।”


उपजाऊ खेत हो रहे बर्बाद

अवैध बंगला ईंट भट्ठों के लिए बड़े पैमाने पर खेतों की उपजाऊ मिट्टी की खुदाई की जा रही है। इससे खेत गड्ढों में तब्दील हो रहे हैं और खेती के लायक नहीं बच रहे। किसानों का कहना है कि मिट्टी निकलने के बाद जमीन वर्षों तक बेकार पड़ी रहती है, जिससे भविष्य में गंभीर कृषि संकट खड़ा हो सकता है।


सरकारी राजस्व को नुकसान

इन अवैध भट्ठों के कारण सरकार को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बिना रॉयल्टी और बिना किसी सरकारी शुल्क के ईंटों का निर्माण और बिक्री की जा रही है। इससे जहां सरकारी खजाने को चूना लग रहा है, वहीं नियमों का पालन करने वाले वैध ईंट भट्ठा संचालक भी प्रभावित हो रहे हैं।


ग्रामीणों में नाराजगी, संरक्षण के आरोप

ग्रामीणों में इस पूरे मामले को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि रात में जलती भट्ठियों की लपटें और दिन में उठता धुआं साफ दिखाई देता है, इसके बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध भट्ठों को कहीं न कहीं संरक्षण मिल रहा है।


प्रशासन और वन विभाग का पक्ष

इस मामले में प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचल अधिकारी संतोष बैठा ने कहा,

“प्रखंड क्षेत्र में संचालित सभी अवैध बंगला ईंट भट्ठों की जांच कर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

वहीं वनपाल कुंवर गंझू ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है और जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अवैध बंगला ईंट भट्ठे किसी भी सूरत में संचालित नहीं होने दिए जाएंगे।


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