उपेक्षा की मार झेल रहा सुरकाई फॉल, सुविधाओं के अभाव में अधूरा पर्यटन सपना

महुआडांड़ प्रखंड का प्रसिद्ध सुरकाई फॉल आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित
हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक पहुँचते हैं, लेकिन सड़क और सुरक्षा व्यवस्था नदारद
बारिश में जर्जर सड़क और शाम के बाद अंधेरा बढ़ाता है जोखिम
स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं में प्रशासनिक उपेक्षा को लेकर नाराज़गी
पर्यटन स्थल घोषित होने से क्षेत्र में रोज़गार और आर्थिक विकास की उम्मीद
महुआडांड़ प्रखंड स्थित सुरकाई फॉल झारखंड के उन प्राकृतिक जलप्रपातों में शामिल है, जो अपनी ऊँचाई से गिरती जलधारा, घनी हरियाली और शांत वातावरण के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है। बावजूद इसके, यह पर्यटन स्थल आज भी विकास की राह ताक रहा है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने सुरकाई फॉल को उपेक्षा का शिकार बना दिया है
सुविधाओं की कमी बनी बड़ी बाधा
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, हर वर्ष बरसात और छुट्टियों के मौसम में बड़ी संख्या में स्थानीय व दूर-दराज़ के पर्यटक सुरकाई फॉल देखने आते हैं। लेकिन यहाँ तक पहुँचने वाली सड़क बेहद जर्जर हालत में है। बारिश के दिनों में यह सड़क कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो जाती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।इसके अलावा, शौचालय, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और सुरक्षा व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाएँ न होने से पर्यटकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों में बढ़ता आक्रोश
इस लगातार उपेक्षा को लेकर ग्रामीणों और युवाओं में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सरकार ने ध्यान नहीं दिया, तो यह महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर अपनी पहचान खो सकती है।एक स्थानीय ग्रामीण ने कहा,हर साल लोग यहाँ आते हैं, लेकिन न सड़क है, न रोशनी, न सुरक्षा। अगर सरकार ध्यान दे, तो यह इलाका पर्यटन से चमक सकता है।”
पर्यटन से विकास की उम्मीद
ग्रामीणों का मानना है कि यदि सुरकाई फॉल को राज्य पर्यटन स्थल घोषित कर यहाँ आधारभूत संरचना का विकास किया जाए, तो होटल, दुकान, गाइड सेवा, परिवहन और अन्य स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा। इससे न केवल महुआडांड़, बल्कि पूरे लातेहार और पलामू प्रमंडल में रोज़गार और आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
प्रशासन से मांग
स्थानीय जनता की प्रमुख माँग है कि सरकार सुरकाई फॉल की सुध ले, इसे आधिकारिक पर्यटन स्थल घोषित करे और आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराए, ताकि यह प्राकृतिक सौंदर्य सुरक्षित रहते हुए क्षेत्र के विकास का माध्यम बन सके।
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