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हवाओं में बसी एक दास्तान: नेतरहाट की मैग्नोलिया और चरवाहे का अधूरा प्रेम

महुआडांड़ नेतरहाट झारखंड की रानी कही जाने वाली यह पहाड़ी धरती जितनी खूबसूरत है, उतनी ही रहस्यमयी भी नेतरहाट की वादियों में हरियाली, ठंडी हवाएं और सुकून तो है ही, लेकिन इन्हीं पहाड़ों के बीच दबी है एक ऐसी प्रेमकथा, जो आज भी लोगों की आंखें नम कर देती है यह कहानी है एक अंग्रेज अफसर की बेटी मैग्नोलिया और एक साधारण चरवाहे की एक ऐसा प्रेम, जो सामाजिक दूरी और सत्ता की क्रूरता का शिकार हो गया।

सूर्यास्त स्थल और प्रेम की पहली आहट

कहानी उस दौर की है जब देश आज़ाद नहीं हुआ था। एक अंग्रेज अफसर ने नेतरहाट के मौसम और प्राकृतिक सौंदर्य से प्रभावित होकर यहीं बसने का निर्णय लिया उसके साथ उसकी बेटी मैग्नोलिया भी आई उसी समय नेतरहाट में एक चरवाहा हुआ करता था,जिसकी बांसुरी की तान में ऐसा जादू था कि जंगल, पशु और इंसान सब ठहर जाते थे हर शाम वह सूर्यास्त स्थल पर बैठकर बांसुरी बजाता और पहाड़ों को संगीत से भर देता एक दिन वही धुन मैग्नोलिया को वहां खींच लाई पहली नजर, पहला स्वर और बिना कहे ही दो दिल एक-दूसरे को समझने लगे।

शब्दों से पहले संगीत ने जोड़ा दिल

दिन बीतते गए मैग्नोलिया हर शाम उसी जगह पहुंचने लगी कोई वादा नहीं, कोई सपना नहीं बस साथ बैठकर ढलते सूरज को देखना और बांसुरी की मधुर तान में खो जाना यह प्रेमदिखावे से दूर था, लेकिन भावनाओं से भरपूर स्थानीय लोग मानते हैं कि नेतरहाट की हवा में आज भी उस बांसुरी की गूंज है।

जब प्रेम बना गुनाह

लेकिन यह सुकून ज्यादा दिन टिक नहीं सका जब अंग्रेज अफसर को अपनी बेटी और एक साधारण चरवाहे के प्रेम का पता चला, तो उसने इसे अपनी शान के खिलाफ समझा पहले चेतावनी दी गई, फिर धमकी पर प्रेम डरता नहीं चरवाहे के इनकार ने अफसर के गुस्से को हिंसा में बदल दियालोककथाओं के अनुसार, अफसर ने अपने सिपाहियों से चरवाहे की हत्या करवा दी।

इंतज़ार से आत्मोत्सर्ग तक

चरवाहे की मौत से अनजान मैग्नोलिया कई दिनों तकसूर्यास्त स्थल पर उसका इंतज़ार करती रही जब उसे सच्चाई का पता चला—कि उसके अपने पिता ने ही उसके प्रेमी को मरवा दिया तो वह टूट गई।कहा जाता है कि एक दिन वह अपने प्रिय घोड़े पर सवार होकर उसी पहाड़ी किनारे पहुंची, जहां उसका प्रेम जन्मा था, और गहरी खाई में कूदकर अपने जीवन को विराम दे दिया।

मैग्नोलिया प्वाइंट: प्रेम की अंतिम निशानी

इस हृदयविदारक घटना के बाद, वह स्थान मैग्नोलिया प्वाइंट के नाम से जाना जाने लगा।आज भी पर्यटक जब यहां खड़े होकर सूर्यास्त देखते हैं, तो स्थानीय लोग धीमे स्वर में कहते हैं अगर हवा में बांसुरी की हल्की सी तान सुनाई दे, तो समझ लेना… यह उसी प्रेम की आवाज़ है।

नेतरहाट: जहाँ प्रकृति के साथ यादें भी बसती हैं

नेतरहाट आज सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक एहसास है प्रेम, त्याग और स्मृति का यह कहानी हमें याद दिलाती है कि हर प्रेम कहानी मुकम्मल नहीं होती,लेकिन कुछ अधूरी कहानियाँ सदियों तक हवाओं में जिंदा रहती हैं।

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