स्थानांतरण की खबर से उबाल: बारेसांड प्रभारी वनपाल परमजीत तिवारी के समर्थन में सड़क पर उतरे सैकड़ों ग्रामीण

गारू (लातेहार), 5 जनवरी 2026
- बारेसांढ़ प्रभारी वनपाल परमजीत तिवारी के स्थानांतरण की खबर से पूरे क्षेत्र में भारी असंतोष।
- पलायन रोकने और स्थानीय स्तर पर रोजगार देने के लिए ग्रामीणों ने तिवारी जी की सराहना की।
- मायापुर, बारेसांढ़, सुग्गाबांध समेत दर्जनों गांवों की सैकड़ों महिलाएं और पुरुष विरोध में सड़क पर उतरे।
- ग्रामीणों का दावा: उनके रहने से जंगल सुरक्षित है और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
- प्रशासन से तबादला रुकवाने की मांग; ग्रामीणों ने कहा- वे अधिकारी नहीं, परिवार के सदस्य हैं।
स्थानांतरण की खबर और जन-आक्रोश
लातेहार जिले के गारू प्रखंड अंतर्गत बारेसांढ़ प्रभारी वनपाल परमजीत तिवारी के स्थानांतरण की सूचना मिलते ही क्षेत्र के दर्जनों गांवों में उबाल आ गया। जैसे ही यह खबर फैली, सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण महिलाएं और पुरुष एकजुट होकर सड़कों पर उतर आए। ग्रामीणों का यह विरोध किसी नाराजगी के लिए नहीं, बल्कि अपने चहेते अधिकारी को क्षेत्र में ही बनाए रखने के लिए था।
पलायन रोकने में निभाई अहम भूमिका
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि परमजीत तिवारी के कार्यकाल में बारेसांढ़ क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। पूर्व में रोजगार की तलाश में यहाँ के लोगों को केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में पलायन करना पड़ता था, लेकिन तिवारी जी ने स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाया है। उनके इसी मानवीय दृष्टिकोण के कारण ग्रामीण उन्हें अपना मसीहा मान रहे हैं।
जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा का कवच
ग्रामीणों ने भावुक होते हुए बताया कि तिवारी जी सुबह की पहली किरण से लेकर देर रात तक अकेले ही जंगल का भ्रमण करते हैं। उनके सक्रिय रहने से अवैध वन कटाई पर पूरी तरह लगाम लगी हुई है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उन्हें यहाँ से हटाया गया, तो जंगल फिर से असुरक्षित हो जाएगा और वन्यजीवों पर खतरा मंडराने लगेगा।
अधिकारी नहीं, परिवार के सदस्य
विरोध प्रदर्शन में शामिल मायापुर, रामसेली, डांडकोचा, पहाड़कोचा और सुग्गाबांध सहित कई गांवों के लोगों ने एक सुर में कहा कि रेंजर अर्जुन बड़ाइक के बाद लंबे समय बाद उन्हें ऐसा ईमानदार और कर्मठ अधिकारी मिला है।
“तिवारी जी केवल एक सरकारी अधिकारी नहीं हैं, वे हमारे सुख-दुख के साथी हैं। जब भी कोई ग्रामीण परेशानी में होता है, वे रात के अंधेरे में भी मदद के लिए खड़े रहते हैं। हम उन्हें यहाँ से जाने नहीं देंगे।”
— एक प्रदर्शनकारी ग्रामीण महिला
प्रशासन से पुनर्विचार की मांग
हुडूगढ़ा, गोयरा, बंधुआ और तीसिया जैसे दूरस्थ गांवों के ग्रामीणों ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और वन विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि परमजीत तिवारी के स्थानांतरण पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए। उनका मानना है कि क्षेत्र का विकास और जंगल की सुरक्षा केवल उन्हीं के नेतृत्व में संभव है।
JharTimes का संदेश: JharTimes जनता की भावनाओं और धरातल की सच्चाई को प्रशासन तक पहुँचाने का माध्यम है। किसी अधिकारी के लिए ग्रामीणों का ऐसा प्रेम दुर्लभ और सराहनीय है।
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