महुआडांड़ शास्त्री चौक पर बह रहा सिस्टम का सड़ांध, एक साल से सड़क नहीं—नाले में डूबा प्रशासन

महुआडांड़ (लातेहार)महुआडांड़ अनुमंडल के शास्त्री चौक पर आज विकास नहीं, बल्कि प्रशासनिक निकम्मेपन और जवाबदेही की लाश तैरती नजर आ रही है। बीते एक साल से अधिक समय से यहां मुख्य सड़क पर नाली का गंदा पानी बह रहा है, लेकिन हैरत की बात यह है कि जिला प्रशासन को यह बदबू अब तक महसूस नहीं हुई।यह स्थिति किसी पिछड़े टोले या गुमनाम गली की नहीं, बल्कि अनुमंडल मुख्यालय के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त चौराहे की है। इसके बावजूद नाली मरम्मत के नाम पर न तो कोई कार्य शुरू हुआ, न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर झांकने की जरूरत समझी।स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि दर्जनों बार आवेदन दिए गए, मौखिक शिकायतें की गईं, जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार जवाब एक ही मिला—“देखा जाएगा”। नतीजा यह है कि एक साल बीत चुका है और सड़क आज भी गंदे पानी की स्थायी धारा बनी हुई है।गंदगी, बदबू, फिसलन और मच्छरों के कारण इस इलाके में डेंगू, मलेरिया और त्वचा रोगों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, लेकिन प्रशासन के लिए यह समस्या शायद फाइलों से बाहर निकलने लायक नहीं है।सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि इसी सड़क से जनप्रतिनिधि, प्रखंड और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अफसर नियमित रूप से गुजरते हैं। इसके बावजूद यदि यह चौराहा नाले में तब्दील है, तो यह साफ बताता है कि या तो प्रशासन ने जनता की पीड़ा देखना बंद कर दिया है, या फिर जनता की परेशानी उसकी प्राथमिकता में है ही नहीं।नाली मरम्मत और जलनिकासी के नाम पर बनाई गई योजनाएं अब पूरी तरह कागजी ढकोसला साबित हो चुकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ये योजनाएं सिर्फ फाइलों और बैठकों में जिंदा हैं, जमीन पर नहीं। विकास यहां सिर्फ भाषणों और बोर्डों तक सीमित रह गया है।स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि यदि अनुमंडल मुख्यालय का यह हाल है, तो दूरदराज के गांवों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। शास्त्री चौक पर एक साल से बहता गंदा पानी प्रशासनिक विफलता का जीता-जागता सबूत बन चुका है।ग्रामीणों ने अब आर-पार की चेतावनी दी है कि यदि तत्काल नाली मरम्मत और स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे सड़क जाम और जनआंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।अब सवाल बेहद सीधा और तीखा हैक्या जिला प्रशासन जनता को नाले में जीने के लिए मजबूर करेगा, या शास्त्री चौक की इस बदहाली पर आखिरकार नींद से जागेगा
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