संत जेवियर्स कॉलेज महुआडांड़ में अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का भव्य आयोजन, शिक्षा में नवाचार पर हुई सार्थक चर्चा

महुआडांड़ संत जेवियर्स कॉलेज, महुआडांड़ में “उच्च शिक्षा में परिवर्तनकारी शिक्षण पद्धतियाँ एवं गुणवत्ता संवर्धन” विषय पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का सफल और गरिमामय आयोजन किया गया। सेमिनार का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा को नवीन शिक्षण तकनीकों, अनुभवात्मक अधिगम और छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण से जोड़ते हुए शैक्षणिक गुणवत्ता को और अधिक सुदृढ़ बनाना था।इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में जेवियर कॉलेज, मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया) से आईं मुख्य वक्ता मिस लिज़ किम एवं विशिष्ट अतिथि मिस्टर जैक डैवरन की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। ऑस्ट्रेलियाई अतिथियों ने अपने अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक अनुभवों को साझा करते हुए भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली पर महत्वपूर्ण विचार रखे।कार्यक्रम के प्रारंभ में अभय सुकुट डुंगडुंग एवं अंकिता एक्का के नेतृत्व में पारंपरिक आदिवासी नृत्य के माध्यम से अतिथियों का भव्य स्वागत किया गया, जिसने पूरे वातावरण को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कॉलेज के प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोस ने कहा,उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, नैतिक और उत्तरदायी नागरिक बनाना है। परिवर्तनकारी शिक्षण पद्धतियाँ विद्यार्थियों में नवाचार, नेतृत्व और आलोचनात्मक सोच को विकसित करती हैं।”मुख्य वक्ता मिस लिज़ किम ने अपने संबोधन में कहा,आज की शिक्षा को तकनीक, अनुभवात्मक अधिगम और छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। डिजिटल टूल्स और व्यावहारिक शिक्षा विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करती है।”वहीं प्रोफेसर रेचेल सुष्मिता नाग ने गुणवत्ता संवर्धन के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए निरंतर शोध, नवाचार और मूल्य-आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। मिस्टर जैक डैवरन ने अंतरराष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था के अनुभव साझा करते हुए सहयोगात्मक अधिगम, अंतर-सांस्कृतिक संवाद और सतत मूल्यांकन प्रणाली को उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बताया।
सेमिनार में उपस्थित शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने इसे अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और समयोचित बताया। कार्यक्रम में कॉलेज के प्राध्यापकों—डॉ. फादर समीर, डॉ. लियो, डॉ. राजीप, डॉ. प्यारी सहित अनेक शिक्षकों एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही।कार्यक्रम का सफल संचालन एवं समन्वय कार्यक्रम समन्वयक सिस्टर चन्द्रोदया एवं शेफाली प्रकाश के नेतृत्व में किया गया। सेमिनार का समापन प्रो. सुबोध मिंज के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
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