हैवानियत पर चोट: पिता-पुत्र की कस्टोडियल डेथ मामले में 9 पुलिसकर्मियों को ‘सजा-ए-मौत’; अदालत ने करार दिया ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’

तमिलनाडु, 08 अप्रैल 2026
- तमिलनाडु के चर्चित जयराज-बेनिक्स हत्याकांड में 5 साल बाद आया ऐतिहासिक फैसला।
- अदालत ने 9 दोषी पुलिसकर्मियों को सुनाई फांसी की सजा, 1.40 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया।
- जून 2020 में लॉकडाउन के दौरान दुकान खुली रखने पर पिता-पुत्र को पुलिस ने बेरहमी से पीटा था।
- सीबीआई (CBI) की 2000 पन्नों की चार्जशीट और 100 गवाहों के आधार पर जुर्म साबित।
- कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “वर्दी की आड़ में कानून कुचलने वालों के लिए समाज में कोई जगह नहीं।”
इंसाफ की सबसे बड़ी नजीर: वर्दीधारी बने अपराधी
तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले के बहुचर्चित जयराज और उनके बेटे बेनिक्स की पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में अदालत ने न्याय की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है। विशेष अदालत ने इस कृत्य को “मानवता पर कलंक” मानते हुए 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। यह फैसला उन अधिकारियों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो सत्ता और वर्दी के नशे में मानवाधिकारों का गला घोंटते हैं।
क्या था पूरा मामला? (Flashback 2020)
यह घटना जून 2020 की है, जब पूरा देश कोरोना महामारी और लॉकडाउन की बंदिशों में था। जयराज और बेनिक्स पर आरोप था कि उन्होंने तय समय के बाद भी अपनी मोबाइल की दुकान खुली रखी थी। इसी मामूली विवाद में पुलिस उन्हें थाने ले गई, जहाँ रात भर दोनों के साथ ऐसी बर्बरता की गई जिसने रूह कंपा दी। अस्पताल ले जाने के कुछ ही समय बाद दोनों की मौत हो गई।
जांच में बेनकाब हुई पुलिस की दरिंदगी
मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी गई थी। जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले थे:
- अमानवीय यातना: मेडिकल रिपोर्ट में पिता-पुत्र के शरीर पर गंभीर अंदरूनी और बाहरी चोटों की पुष्टि हुई।
- सबूतों से छेड़छाड़: पुलिस ने थाने के सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश की थी।
- विरोधाभासी बयान: आरोपी पुलिसकर्मियों ने खुद को बचाने के लिए झूठी कहानियां गढ़ी थीं, जो 100 से अधिक गवाहों के बयानों के सामने टिक नहीं सकीं।
अदालत का ऐतिहासिक प्रहार
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि पुलिस का काम जनता की रक्षा करना है, न कि भक्षक बनना।
“जब कानून के रक्षक ही हैवान बन जाएं, तो समाज का न्याय व्यवस्था से भरोसा उठ जाता है। यह मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में आता है, जहाँ अपराधियों को उनके पद की गरिमा के कारण कोई रियायत नहीं दी जा सकती।”
— अदालत की टिप्पणी
जुर्माना और मुआवजा
फांसी की सजा के साथ ही अदालत ने दोषियों पर कुल 1.40 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। यह पूरी राशि पीड़ित परिवार को मुआवजे के तौर पर दी जाएगी, ताकि उन्हें आर्थिक संबल मिल सके।
फैसले का महत्व
यह फैसला न केवल जयराज और बेनिक्स के परिवार के लिए न्याय की जीत है, बल्कि भारतीय न्यायिक इतिहास में पुलिस जवाबदेही तय करने का एक मील का पत्थर है। सोशल मीडिया से लेकर मानवाधिकार संगठनों तक, हर तरफ इस फैसले का स्वागत किया जा रहा है।
JharTimes का संदेश: JharTimes न्याय की इस जीत को सलाम करता है। कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह वर्दी में हो या साधारण लिबास में। यह फैसला भविष्य में पुलिस अत्याचारों को रोकने की दिशा में एक बड़ी चेतावनी साबित होगा।
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