बारेसांढ़ धधका: सातवें दिन फूटा गुस्सा, सड़क पर उतरा जनसैलाब*

*परेवाटांड़ बना रणक्षेत्र, “घूसखोर रेंजर वापस जाओ” से कांपा इलाका
गारू (लातेहार), 28 फरवरी 2026
- पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) के बारेसांढ़ वन क्षेत्र में रेंजर के अतिरिक्त प्रभार के खिलाफ 7वें दिन फूटा ग्रामीणों का गुस्सा।
- परेवाटांड़ में उमड़ा जनसैलाब; “घूसखोर रेंजर वापस जाओ” और “जल-जंगल-जमीन हमारा है” के नारों से गूंजा इलाका।
- ग्रामीणों का सवाल: 300 किलोमीटर दूर आनंदपुर में तैनात अधिकारी कैसे करेंगे बारेसांढ़ के संवेदनशील जंगलों की रक्षा?
- पूर्व रेंजर नंद कुमार मेहता के तबादले से नाराजगी; राजनीतिक दबाव में ट्रांसफर का लगाया आरोप।
- डीएफओ को ज्ञापन देने के बाद भी कार्रवाई न होने पर अब वन विभाग कार्यालय के घेराव की तैयारी।
सातवें दिन आंदोलन ने लिया उग्र रूप
बारेसांढ़ वन क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से सुलग रही असंतोष की चिंगारी शनिवार को ज्वाला बन गई। आंदोलन के सातवें दिन परेवाटांड़ गांव विरोध का मुख्य केंद्र रहा, जहाँ सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष और युवाओं ने सड़क पर उतरकर वन विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शनकारियों ने वर्तमान अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे रेंजर तरुण कुमार सिंह के खिलाफ तीखी नारेबाजी की और उन्हें तत्काल हटाने की मांग की।
दूरी और सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
आंदोलनकारियों का सबसे बड़ा तर्क उस भौगोलिक दूरी को लेकर है, जो वन सुरक्षा में बड़ी बाधा बन सकती है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस अधिकारी की मूल तैनाती यहाँ से लगभग 300 किलोमीटर दूर आनंदपुर क्षेत्र में है, उन्हें बारेसांढ़ जैसे अति-संवेदनशील और जैव-विविधता से भरे क्षेत्र का प्रभार देना समझ से परे है।
ग्रामीणों के प्रमुख सवाल:
- क्या इतनी दूरी से अवैध वन कटाई और शिकार पर नियंत्रण संभव है?
- आपात स्थिति में क्या अधिकारी समय पर मौके पर पहुँच पाएंगे?
- क्या दूर बैठा अफसर स्थानीय ग्रामीणों की समस्याओं और आजीविका को समझ पाएगा?
गांव-गांव में फैला असंतोष
इस आंदोलन की लहर केवल एक गांव तक सीमित नहीं है। डेढ़गांव, बगईकोना, झुमरी, टेनटांड, कुजरूम, लाटू और मायापुर जैसे दर्जनों गांवों में आक्रोश उबल रहा है। सभा को संबोधित करते हुए बुजुर्गों ने कहा कि जंगल उनकी जिंदगी है और इसकी सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। युवाओं ने स्पष्ट किया कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो यह प्रदर्शन प्रखंड से निकलकर जिला मुख्यालय तक पहुँचेगा।
पूर्व रेंजर के समर्थन में आए लोग
आक्रोश का एक बड़ा कारण पूर्व रेंजर नन्द कुमार मेहता का तबादला भी है। ग्रामीणों के अनुसार, उनके कार्यकाल में विभाग और जनता के बीच बेहतर समन्वय था। लोगों का आरोप है कि एक ईमानदार अधिकारी को राजनीतिक दबाव के तहत हटाया गया है, जिससे वन सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई है।
“प्रशासन हमारी भावनाओं के साथ खेल रहा है। हमने डीएफओ कुमार आशीष को लिखित आवेदन दिया, सात दिन बीत गए लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ। अब शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बजाय हम विभाग का घेराव करने को मजबूर होंगे।”
— एक प्रदर्शनकारी ग्रामीण नेता
प्रशासन को अल्टीमेटम
प्रदर्शनकारियों ने वन विभाग और जिला प्रशासन को अंतिम चेतावनी दी है। यदि जल्द ही किसी नियमित और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध रहने वाले रेंजर की नियुक्ति नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। फिलहाल बारेसांढ़ में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और वन विभाग के कार्यालयों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
JharTimes का संदेश: JharTimes हमेशा जनहित और पर्यावरण सुरक्षा के मुद्दों को प्रमुखता देता है। बारेसांढ़ के जंगलों की सुरक्षा और ग्रामीणों का विश्वास बहाल करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
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