लातेहार में एसटी परिवारों के घर तोड़ने की सूचना पर विधानसभा में गूंजा मामला, पुनर्वास को लेकर सरकार पर दबाव

रांची/लातेहार, 28 फरवरी 2026
- लातेहार के तापा खास में 40-50 एसटी परिवारों के घर तोड़ने की सूचना पर विधानसभा में तीखी बहस।
- विधायक प्रकाश राम ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए सरकार को घेरा; दशकों से बसे भूमिहीनों के हक की वकालत।
- चंदनडीह विस्थापितों का मुद्दा भी उठा; 2011-12 से अब तक नहीं हो सका पूर्ण पुनर्वास।
- मंत्री दीपक बिरुआ का आश्वासन: 40-50 वर्षों से काबिज भूमिहीनों को बसाना सरकार की जिम्मेदारी।
- सीओ और डीसी की रिपोर्ट में विरोधाभास; नावाडीह की जमीन पर जतरा मेला और धार्मिक स्थल का विवाद।
विधानसभा में गरमाया लातेहार का मुद्दा
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान लातेहार जिले के तापा खास में दशकों से बसे आदिवासी परिवारों के विस्थापन का मामला प्रमुखता से उठा। लातेहार विधायक प्रकाश राम ने सदन को सूचित किया कि प्रशासन द्वारा लगभग 40-50 एसटी परिवारों के घरों को अवैध बताकर तोड़ने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने पुरजोर तरीके से कहा कि जो परिवार पिछले 4-5 दशकों से गैर-मजरुआ जमीन पर रह रहे हैं, उन्हें उजाड़ने के बजाय वैकल्पिक जमीन देकर सम्मानपूर्वक बसाया जाना चाहिए।
चंदनडीह विस्थापितों का अधूरा दर्द
चर्चा के दौरान वर्ष 2011-12 के चंदनडीह प्रकरण की यादें भी ताजा हो गईं। विधायक ने सरकार को याद दिलाया कि उस समय तोड़े गए सैकड़ों घरों के बदले 155 परिवारों को केवल दो-दो डिसमिल जमीन आवंटित की गई थी, लेकिन वे आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अस्थायी झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने इन परिवारों के स्थायी और पूर्ण पुनर्वास की मांग दोहराई।
सरकार का पक्ष और सात डिसमिल का प्रावधान
मामले पर जवाब देते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दीपक बिरुआ ने स्पष्ट किया कि यदि यह प्रमाणित होता है कि संबंधित परिवार भूमिहीन हैं और लंबे समय से काबिज हैं, तो राज्य सरकार उन्हें बसाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जानकारी दी कि नियमों के तहत मांग आने पर सात डिसमिल तक जमीन की बंदोबस्ती की जा सकती है। साथ ही, वन भूमि पर खेती करने वालों को नियमानुसार पट्टा देने का भी प्रावधान है।
रिपोर्ट में विरोधाभास और नई जांच का आश्वासन
सदन में तब स्थिति रोचक हो गई जब विधायक प्रकाश राम ने अंचल अधिकारी (CO) और उपायुक्त (DC) की रिपोर्ट में अंतर का मुद्दा उठाया। सीओ की रिपोर्ट के अनुसार नावाडीह की जमीन पर जतरा मेला और धार्मिक आयोजन होते हैं, जबकि डीसी की रिपोर्ट इसे विवाद मुक्त बताती है। इस पर नेता प्रतिपक्ष ने भी हस्तक्षेप करते हुए विस्तृत सर्वे की मांग की। विवाद को देखते हुए मंत्री ने डीसी से पुनः विस्तृत रिपोर्ट मंगवाने का आश्वासन दिया है।
“दो डिसमिल जमीन पर एक आदिवासी परिवार, जो पशुपालन भी करता है, कैसे गुजारा करेगा? सरकार को अतिक्रमणकारी कहने से पहले उनके पुनर्वास के लिए मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।”
— नेता प्रतिपक्ष, झारखंड विधानसभा
प्रशासनिक पहल की आवश्यकता
विधायक ने अंत में प्रशासन से सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि नावाडीह में बसने गए विस्थापितों और स्थानीय लोगों के बीच टकराव की स्थिति बनी थी, जिसे सुलझाना प्रशासन की जिम्मेदारी है ताकि शांतिपूर्ण ढंग से पुनर्वास प्रक्रिया पूरी हो सके।
JharTimes का संदेश: JharTimes विस्थापितों और वंचितों की आवाज को शासन तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। तापा खास के इन परिवारों को न्याय मिलना ही चाहिए।
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