भूख से जूझ रहा है कोरवा परिवार, दिसंबर का राशन अब भी बकाया

गारू और बरवाडीह प्रखंड से कटकर अलग बने सरयू प्रखंड के गणेशपुर पंचायत अंतर्गत गणेशपुर गांव स्थित जामुनकोना टोला में निवास करने वाले आदिम जनजाति कोरवा समुदाय के 7–8 परिवार इन दिनों गंभीर खाद्य संकट से जूझ रहे हैं। इन परिवारों को नियमित रूप से सरकारी राशन नहीं मिल पा रहा है, जिससे भुखमरी का खतरा गहराता जा रहा है।ग्रामीणों के अनुसार सितंबर, अक्टूबर और नवंबर माह का राशन एक साथ वितरित किया गया, लेकिन दिसंबर माह का राशन अब तक नहीं मिला है। बताया गया है कि दिसंबर, जनवरी और फरवरी तीनों माह का राशन एक साथ दिया जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि तब तक ये आदिम जनजाति परिवार अपना गुजर-बसर कैसे करेंगे।राशन से वंचित रहने वाले पीवीटीजी कोरवा समुदाय के परिवारों में हिरामुणी देवी, लक्ष्मी देवी, रतनी देवी, मनिता देवी, अनिल कोरवा, छन्दु कोरवा, सुनील कोरवा और बन्धु कोरवा शामिल हैं। इन परिवारों का कहना है कि वे पूरी तरह सरकारी राशन पर निर्भर हैं और समय पर अनाज नहीं मिलने से बच्चों और बुजुर्गों के सामने भोजन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।ग्रामीणों ने बताया कि गणेशपुर पंचायत के आदिम जनजाति परिवारों के लिए राशन बरवाडीह स्थित गोदाम से आता है, लेकिन वितरण व्यवस्था में लापरवाही के कारण उन्हें समय पर राशन नहीं मिल पा रहा है।
क्या कहते हैं आपूर्ति पदाधिकारी
इस संबंध में राजेश कुमार, प्रभारी प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, बरवाडीह ने बताया कि आदिम जनजाति परिवारों के लिए हर माह राशन का आवंटन किया जाता है। उन्होंने स्वीकार किया कि दिसंबर माह का राशन फिलहाल बकाया है, जो बोरों की कमी के कारण अब तक नहीं भेजा जा सका है। उन्होंने कहा कि जल्द ही समस्या का समाधान कर राशन पहुंचाने की कार्रवाई की जाएगी।
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