उप स्वास्थ्य केंद्र की CHO सुप्रिया बनी ग्रामीणों के लिए नई आशा

महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत अक्सी स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र में तैनात CHO (कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर) सुप्रिया कुजूर अपने उत्कृष्ट कार्यों से ग्रामीणों के लिए आशा की किरण बनकर उभरी हैं। अक्सी उप स्वास्थ्य केंद्र में यह उनका पहला पोस्टिंग है, जहां उन्होंने अपनी कर्तव्यनिष्ठा, मेहनत और समर्पण से स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दी है।सुप्रिया कुजूर बताती हैं कि जब उन्होंने उप स्वास्थ्य केंद्र का कार्यभार संभाला, उस समय यहां बिजली, पानी सहित कई बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। उन्होंने चरणबद्ध तरीके से सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कीं। वर्तमान में उप स्वास्थ्य केंद्र में समुचित सुविधाएं उपलब्ध हैं और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में विश्वास बढ़ा है।उन्होंने कहा कि “हमारा लक्ष्य केवल इलाज करना नहीं, बल्कि स्वच्छ वातावरण में बेहतर और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवा देना है। जब परिसर साफ रहेगा, तो लोग बिना झिझक इलाज के लिए आएंगे।” टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच और देखभाल उनकी प्राथमिकता में शामिल है। वे 24 घंटे उप स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध रहती हैं। साथ ही प्रसव के बाद नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए केंद्र में बेबी वॉर्मर की विशेष व्यवस्था की गई है।
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया
अक्सी गांव की एक ग्रामीण महिला ने बताया पहले यहां आने में डर लगता था, लेकिन अब केंद्र पूरी तरह साफ-सुथरा रहता है। दीदी बहुत अच्छे से समझाकर इलाज करती हैं। गर्भवती महिलाओं को समय पर जांच और दवा मिल रही है, जिससे गांव की महिलाओं को काफी राहत मिली है। वहीं एक अन्य ग्रामीण ने कहा कि सुप्रिया कुजूर के आने के बाद उप स्वास्थ्य केंद्र में नियमितता बढ़ी है और ग्रामीणों का भरोसा स्वास्थ्य सेवाओं पर और मजबूत हुआ है।
CHO सुप्रिया कुजूर का बयान
इस अवसर पर CHO सुप्रिया कुजूर ने कहा मैं खुद को सौभाग्यशाली मानती हूं कि मुझे ग्रामीण क्षेत्र में सेवा करने का अवसर मिला। मेरा निरंतर प्रयास है कि कोई भी महिला या बच्चा इलाज के अभाव में परेशान न हो। जब तक यहां रहूंगी, पूरी निष्ठा और ईमानदारी से ग्रामीणों की सेवा करती रहूंगी। ग्रामीणों का भरोसा ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।”ग्रामीणों की प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि सुप्रिया कुजूर के प्रयासों से उप स्वास्थ्य केंद्र में न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर हुई है, बल्कि स्वच्छता और सक्रिय भागीदारी के माध्यम से ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। ऐसी पहल भविष्य में गांवों को स्वस्थ और सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।
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