6 महीने पहले बनी पुलिया टूटने के कगार पर, कभी भी घट सकती है बड़ी दुर्घटना

महुआडांड़–लोढ़ फॉल मुख्य मार्ग पर बनी पुलिया 6 महीने में ही जर्जर
🔹 48 लाख रुपये की लागत, लेकिन एप्रोच पूरी तरह धंसा
🔹 मरम्मत के नाम पर सिर्फ क्रशर डस्ट डालकर लीपापोती
🔹 ग्रामीणों और राहगीरों में भारी नाराजगी, दुर्घटना का खतरा
🔹 घटिया निर्माण की आशंका, उच्चस्तरीय जांच की मांग
महुआडांड़–लोढ़ फॉल मुख्य मार्ग पर रेगाइ गांव के समीप पथ निर्माण विभाग द्वारा लगभग 48 लाख रुपये की लागत से बनाई गई पुलिया आज ग्रामीणों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि खतरे का कारण बन गई है। महज छह महीने पहले बनी यह पुलिया अब टूटने के कगार पर है। पुलिया का एप्रोच पूरी तरह धंस चुका है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, निर्माण कार्य पूरा होते ही पुलिया में दरारें नजर आने लगी थीं। इसकी सूचना विभागीय अधिकारियों को समय रहते दी गई, लेकिन लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति
कुछ दिन पहले जब स्थानीय अखबारों में खबर प्रकाशित हुई, तब ठेकेदार की ओर से मरम्मत का काम शुरू किया गया। लेकिन मरम्मत के नाम पर केवल क्रशर (क्रसर) डस्ट डालकरऔपचारिकता निभा दी गई। यह अस्थायी उपाय कुछ ही दिनों में फेल हो गया और एप्रोच दोबारा धंसने लगा।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
इस लीपापोती से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। एक स्थानीय ग्रामीण ने कहा 48 लाख रुपये की पुलिया क्या सिर्फ क्रशर डस्ट से टिकेगी? यह समाधान नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार छिपाने की कोशिश है।”एप्रोच खराब होने से दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के मौसम में गड्ढों में पानी भर जाने से फिसलन बढ़ जाती है, जिससे स्कूली बच्चों, मरीजों और राहगीरों की जान हर समय खतरे में बनी रहती है।
जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिया निर्माण में घटिया सामग्री और गंभीर लापरवाही बरती गई है। उन्होंने पथ निर्माण विभाग से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई की जाए और पुलिया का दोबारा मजबूत व गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाए।
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